This is chalte chale website owner please read my artical and enjoy your self

     JHASI ki Rani Kavita class 8th | झांसी की रानी कविता


         Chapter:-jhasi ki Rani |झांसी की रानी।

              Class:-8th/10th Non Hindi। 


सिंहासन  हिल  उठे, राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,

बुड्ढे भारत में भी आई फिर से नई जवानी थी,

गुमी हुई आज़ादी की कीमत  सबनेे  पहचानी थी,

दूर फिरंगी को  करने  की सबने मन  में ठानी थी, 

                चमक उठी सन सत्तावन में

             वह तलवार पुरानी थी

                 बुंदेले हरबोलों के मुंह  

                 हमने सुनी कहानी थी।

                 खूब लड़ी मर्दानी वह तो

                 झांसी वाली रानी थी।।



कानपुर के नाना की मुंहबोली बहन  छविली  थी,

लक्ष्मीबाई नाम पिता का  वह संतान अकेली थी,

नाना के संग पढ़ती थी वह, नाना के संग खेलती थी,

बरछी, ढाल, कृपाल, कटारी उसकी यही सहेली थी,



                वीर शिवाजी की गाथाएं

                उसको याद जवानी थी।

                बुंदेले हरबोलों के मुंह

                बुंदेलेनी कहानी थी।

                खूब लड़ी मर्दानी वह तो

                झांसी वाली रानी थी।।


लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,

देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों की वार

नकली युद्ध व्यूह की रचना और खेलना खूब शिकार,

सैन्य घेरना, दुर्ग तोड़ना ये थे उसके प्रिय खिलवाड़,




              महाराष्ट्र- कुल-देवी उसकी

            भी आराध्य भवानी थी।

            बुंदेले हरबोलों के मुंह

             हमने सुनी कहानी थी ।

             खूब लड़ी मर्दानी वह तो

             झांसी वाली रानी थी।।



हुई वीरता की वैभव के साथ सगाई झांसी में,

ब्याह हुआ रानी बन गई आई लक्ष्मीबाई झांसी में,

राजमहल में बजी बधाई खुशियां छाई झांसी में,

 सुभट बुंदेलों की विरुदावलि - सी वह आई झाँसी में ,



                चित्रा ने अर्जुन को पाया

              शिव से मिली भवानी थी ।

               बुंदेले हरबोलों के मुँह

               हमने सुनी कहानी थी । 

               खूब लड़ी मर्दानी वह तो

                झाँसी वाली रानी थी ।।

        

उदित हुआ सौभाग्य , मुदित महलों में उजियाली छाई , 

किन्तु कालगति चुपके - चुपके काली घटा घेर लाई ,

 तीर चलानेवाले कर में उसे चूड़ियाँ कब भाई , 

रानी विधवा हुई हाय ! विधि को भी नहीं दया आई 


  

                        नि : संतान मरे राजाजी । 

                     रानी शोक - समानी थी । 

                      बुंदेले हरबोलों के मुँह

                      हमने सुनी कहानी थी ।

                      खूब लड़ी मर्दानी वह तो

                      झांसी वाली रानी थी ।।



बुझा दीप झाँसी का तब डलहौजी मन में हरषाया ,

 राज्य हड़प करने का उसने यह अच्छा अवसर पाया 

फ़ौरन फौजें भेज दुर्ग पर अपना झंडा फहराया , 

लावारिस का वारिस बनकर ब्रिटिश राज्य झाँसी आया ,


अश्रुपूर्ण रानी ने देखा 

झाँसी हुई बिरानी थी ।

 बुंदेले हरबोलों के मुंह 

हमने सुनी कहानी थी । 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो

 झाँसी वाली रानी थी ।।


 छिनी राजधानी देहली की , लिया लखनऊ बातों - बात कैद पेशवा था बिठूर में , हुआ नागपुर पर भी घात उदयपुर , तंजौर , सतारा , कर्नाटक की कौन बिसात जब कि सिन्ध , पंजाब , ब्रह्म पर अभी हुआ था बज्र - निपात 


बंगाले , मद्रास आदि की 

भी तो वही कहानी थी ।

 बुंदेले हरबोलों के मुँह 

हमने सुनी कहानी थी ।

 खूब लड़ी मर्दानी वह तो

 झाँसी वाली रानी थी ।।


 इनकी गाथा छोड़ चलें हम झाँसी के मैदानों में , 

जहाँ खड़ी है लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानों में , 

लेफ्टिनेंट वॉकर आ पहुँचा , आगे बढ़ा जवानों में , 

रानी ने तलवार खींच ली , हुआ द्वंद्व असमानों में ,


   जख्मी होकर वॉकर भागा ,

 उसे अजब हैरानी थी । 

बुंदेले हरबोलों के मुंह 

हमने सुनी कहानी थी । 

खूब लड़ी मर्दानी वह तो 

झाँसी वाली रानी थी ।। 


रानी बढ़ी कालपी आई , कर सौ मील निरंतर पार, घोड़ा थककर गिरा भूमि पर , गया स्वर्ग तत्काल सिधार , यमुना - तट पर अंग्रेजों ने फिर खाई रानी से हार, विजयी रानी आगे चल दी , किया ग्वालियर पर अधिकार,
















एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ